एम्स भोपाल में फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी पर कार्यशाला


ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, भोपाल में फोरेंसिक मेडिसिन और विष विज्ञान विभाग द्वारा भारत की पहला हैंड्स ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर प्रो. (डॉ.) सरमन सिंह, निदेशक और सीईओ, एम्स, भोपाल ने अपने भाषण में, फॉरेंसिक मेडिसिन में हिस्टोपैथोलॉजी के महत्व और फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा इन तकनीकियों को शुरू करने की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया। हिस्टोपैथोलॉजी उन मामलों में मृत्यु का कारण निर्धारित करने में वास्तव में उपयोगी है जहां शव परीक्षण के दौरान सावधानीपूर्वकर थूल परीक्षण भी निरर्थक साबित होता है। कार्यशाला छह सत्रों में आयोजित की गई। देश भर से प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिष्ठित महानुभावों ने सत्रों का संचालन किया, इसमें गुजरात से डॉ. डी. एन. लांजेवार द्वारा फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी और इसके महत्व को शामिल किया गया, जिन्होंने प्राकृतिक रोग प्रक्रियाओं की पुष्टि करने और मूल्यांकन करने में हिस्टोपैथोलॉजी के महत्व पर प्रकाश डाला। पीजीआई एम ईआर, चंडीगढ़ से डॉ. सेंथिल कुमार द्वारा फोरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी के रोचक प्रकरणों पर चर्चा की गई। नमूने के सही तरीके और इसके उपयोग के बाद ऊतक का निपटान कैसे करें, इसके बारे में पीजीआई एम ईआर, चंडीगढ़ के डॉ. पुलकित रस्तोगी ने बताया। दिल और मस्तिष्क से विच्छेदन और नमूनाकरण पर सत्र क्रमशः सेठ जीएसएम सी और केईएम अस्पताल, मुंबई में डॉ. प्रदीप वैदेश्वर और डॉ. आशा शेनॉय द्वारा सुगम किया गया। अतिथि संकायों ने सामान्य हिस्टोपैथोलॉजिकल तकनीकियों को अपनाने और प्रत्येक तृतीयक संस्थान में एक हिस्टोपैथोलॉजी प्रयोगशाला शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. (डॉ.) सरमन सिंह, निदेशक और सीईओ, एम्स, भोपाल ने इस तरह के आयोजन के लिए फॉरेंसिक मेडिसिन और विष विज्ञान विभाग एम्स, भोपाल के प्रयासों की प्रशंसा की। इस अवसर पर प्रो.(डॉ.) अरनीत अरोरा डीन (अकादमिक) और विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी एम्स, भोपाल एवं आयोजन अध्यक्ष, डॉ. जयंती यादव, आयोजन सचिव, डॉ. राघवेंद्र विदुवा, संयुक्त सचिव, फोरेंसिक मेडिसिन, पैथोलॉजी और प्रयोगशाला चिकित्सा विभाग के संकाय सदस्य उपस्थित थे।