भोपाल में पहली बार हुआ बिना ब्लड ग्रुप मैच  के किडनी ट्रांसप्लांट


शहर के बंसल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल ने  भोपाल में पहली बार किडनी फेलियर के तीन मरीजों के शरीर में बिना ब्लड ग्रुप मैच  के  डोनर्स के गुर्दा प्रत्यारोपण कर एक नया इतिहास रचा है.


प्रत्यारोपण करने वाली टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट व प्रत्यारोपण फिजिशियन डॉक्टर विद्यानंद त्रिपाठी और डॉक्टर गणेश धनुका, यूरोलॉजिस्ट एवं प्रत्यारोपण सर्जन डॉक्टर संतोष अग्रवाल ,  एनेस्थीसिया विभाग से डॉक्टर रितेश ,डॉक्टर दीपा ,डॉक्टर लक्ष्मीकांत ,डॉक्टर  अभिनव, ट्रांसप्लांट  नर्सिंग टीम , डायलिसिस  व OT की टेक्निकल टीम शामिल  रही.


गुर्दा फैलियर के मरीजों में एक खुशहाल जिंदगी पाने के लिए गुर्दा प्रत्यारोपण मुख्य विकल्प होता है लेकिन ज्यादातर मरीजों के पास परिवार में ब्लड ग्रुप मैचिंग वाले डोनर ना होने की वजह से उन्हें डायलिसिस में रहना पड़ता है. ऐसे में बिना ब्लड ग्रुप के ट्रांसप्लांट मरीज के लिए एक नया जीवन  देने जैसा है. ट्रांसप्लांट सर्जन डॉक्टर संतोष अग्रवाल के अनुसार बंसल अस्पताल में सभी तरह के जटिल गुर्दा प्रत्यारोपण जैसे कि स्वैप ट्रांसप्लांट, कैडेवर ट्रांसप्लांट, पीडियाट्रिक ट्रांसप्लांट,,  पहले से ही हो रहे हैं, बड़ी बात यह है कि इन सभी ऑपरेशंस में डोनर्स की सर्जरी लेप्रोस्कोपिक विधि से की जा रही है.


नेफ्रोलॉजिस्ट  डॉक्टर विद्यानंद त्रिपाठी  ने बताया कि बिना ब्लड ग्रुप मैच के प्रत्यारोपण करने  से पहले मरीज के शरीर से ब्लड ग्रुप  एंटीबॉडीज  को प्लाज्मफरेसिस के माध्यम से शरीर से निकाला जाता है इस प्रक्रिया में 2 से 3 हफ्ते का समय लगता है  लेकिन हमने इस प्रोसेस को Immunoadsorption Method (Glycosorb column)से किया जिसमें मात्र 1 से 2 दिन की ही प्लाज्मफरेसिस से Blood group antibodies को मरीज के शरीर से निकाला  गया.ऑपरेशन के बाद तीनों ही मरीज पहले हफ्ते में ही अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए और आज वे बिल्कुल नॉर्मल जिंदगी जी रहे हैं.


अस्पताल के एमडी श्री सुनील बंसल ने बताया  कि गुर्दा प्रत्यारोपण के क्षेत्र में बंसल अस्पताल आज मध्य भारत का प्रमुख केंद्र माना जाता है और इस सफलता के लिए हमारी ट्रांसप्लांट टीम बधाई की पात्र है. हमारा आगे भी प्रयास रहेगा कि कि हम  सभी प्रकार की विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं  भोपाल मैं उपलब्ध करा  पाएं.