गणतंत्र दिवस परमध्य प्रदेश लेखक संघ की राष्ट्रभक्ति काव्यगोष्ठी आयोजित

 

भोपाल । आज देश के समक्ष भीतरी एवं बाहरी शक्तियाँ चुनौती बनकर खड़ी हैं । उनके मुकाबले के लिये जनता को जागरूक करने में राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत रचनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है । उक्त उद्गार मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रादेशिक राष्ट्र भक्ति काव्यगोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि श्री बटुक चतुर्वेदी ने व्यक्त किये । आपने अपनी रचना -

'इतना पतन हमारा होगा यह अनुमान न था ,

पहले तो ऐसा अपना हिन्दुस्तान न था ।' 

पढ़ी । संघ के स्वर्णजयन्ती वर्ष के अंतर्गत बा और बापू के 150वे जन्मवर्ष को समर्पित गोष्ठी के सारस्वत अतिथि प्रसिद्ध ओज कवि श्री पंवार राजस्थानी ने अपनी रचनाओं से वीर रस को जीवंत कर दिया । आपकी रचना -

'अब कायर व्यक्तित्व देश को नहीं चाहिये ।

कालिख लगा चरित्र देश को नहीं चाहिये ।

कुचल न पाये जो आतंकी सर्पों के फन

अब ऐसा नेतृत्व देश को नहीं चाहिये ।'

बेहद सराही गयी । गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डाॅ. राम वल्लभ आचार्य ने अपनी रचना -

'वह नमक न था, था स्वाभिमान,

हाथों में जिसे उठाया था ।

कानून तोड़कर बापू ने

दांडी में नमक बनाया था ।'

पढ़कर बापू को स्मरण किया । गोष्ठी में वरिष्ठ कवि मनोहर पटेरिया मधुर ने -

'गणतंत्र देश का खो न जाये कुहासे में,

धमनियां देश की आज सभी मशाल बनें ।'

पढ़कर वाहवाही लूटी । अशोक नगर से आये सुभाष जैन सरस ने अपनी कविता -

'हे गाँधी तेरे देश में अन्याय अनीति भ्रष्टाचार का शोर है ।' पढ़कर वर्तमान स्थितियों पर चिन्ता व्यक्त की ।  जया आर्य ने -

'अंधकार में सिसक रहा है देश क्यों ?

सत्य अहिंसा प्रेम को तरस रहा है देश क्यों?'

तथा पुरुषोत्तम तिवारी साहित्यार्थी ने -

'देखो भारत की दीनदशा सुन लो इसकी कातर पुकार ,

भारत की रक्षा करने फिर आओ गाँधी जी एक बार ।' 

पढ़कर बापू का आव्हान किया । इन्दौर से पधारे कवि नलिन खोईवाल ने -

'शान भारत की हम बढ़ायेंगे ,

आसमां तक भी लेके जायेंगे ।' 

भोपाल की कवयित्री डाॅ. क्षमा पाण्डेय ने -

'हे भारत की सेना हमें गर्व है तुम पर ।' 

प्रस्तुत की । उज्जैन से आये कवि रफ़ीक नागौरी ने अपनी पंक्तियाँ -

'जान वो जान है जो जाये वतन की खातिर,

सर वही सर है जो सरहद पे कभी कट जाये।' पढ़कर खूब दाद बटोरी । गोष्ठी का संचालन कर रहे गुना के कवि अनिरुद्ध सिंह सेंगर ने अपनी ओजस्वी वाणी में अपनी रचना -

'सद्कर्मों की पावन ज्योति जलाते हैं गाँधी जी ।

सत्यमार्ग पर चलने की राह दिखाते हैं गाँधी जी ।' 

पढ़कर बा बापू को श्रद्धांजलि दी । प्रारंभ में अतिथियों ने माँ शारदे की अर्चना की । अतिथि कवियों का स्वागत डाॅ. प्रीति प्रवीण खरे ने किया तथा आभार प्रदर्शन महेश सक्सेना  ने किया ।

कैलाश चन्द्र जायसवाल

प्रादेशिक मंत्री