राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग के नोटिस को नजरंदाज कर रहा है इंदौर प्रशासन

इंदौर, 26 दिसंबर 2019 । करीब दो साल पहले एम वाय अस्पताल इंदौर के शिशु वार्ड में आग लगने से 47 बच्चों की जान खतरे में पड़ गयी थी और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक बच्चे की मौत का कारण भी यह आग थी । इस पूरी घटना की शिकायत विभिन्न संबंधति विभागों के साथ ही राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग (NCPCR) को भी जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा दिनांक 25/11/2017 को स्थानीय मीडिया की खबरों के आधार पर की गयी थी । मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग ने जिला कलेक्टर इंदौर को नोटीस जारी कर जाँच रिपोर्ट्स के साथ ही मामले से सम्बंधित समस्त दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया था, परन्तु स्थानीय प्रशासन को बार बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी पिछले दो साल से लगातार राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग के नोटीस की अवमानना की जा रही और कोई जवाब नही दिया जा रहा है ।

महत्वपूर्ण तथ्य यह है की मामले की जाँच समिति में उन लोगों को शामिल किया गया था जिनके विरुद्ध अनैतिक दवा परिक्षण के मामले में विभागीय जाँच चल रही है जबकि अपने बच्चे को खोने वाले माता पिता से किसी प्रकार की कोई बातचीत नहीं की गयी है । 

इस पुरे प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन द्वारा घटना के दो साल भी कोई स्पष्ट कारण नहीं देना अस्पताल प्रबंधन की गंभीर घटना के प्रति असंवेदनशीलता है ।

जन स्वास्थ्य अभियान सरकार और प्रशासन से मांग करता है की जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाये और मृतक बच्चे के परिजनों को नियमानुसार सहायता दे । 

अमूल्य निधि   एस. आर. आज़ाद 

Popular posts from this blog

Madhya Pradesh Tourism hosts its first Virtual Road Show

UK में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में एक दिन में 27% की बढ़त।

गूगल की नई AR  टेक्नोलॉजी से अब आप अपने घर बैठे किसी भी जानवर का 3D व्यू देखिये |