स्वयं की नाकामी के खिलाफ धरने पर शिवराज: अभय दुबे

 भोपाल, 24 सितंबर 2019। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने जारी एक बयान में बताया कि भाजपा से अपेक्षा है कि वह मध्यप्रदेश में एक गंभीर प्रतिपक्षीय राजनैतिक दल की तरह व्यवहार करे। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा पर भी भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अपनी सत्ता जाने की निराशा का प्रदर्शन कर रहे हैं। मंदसौर के धरने में उन्हें समर्थन नहीं, अब वे नसरूल्लागंज में धरने पर बैठे हैं और आश्चर्य की बात तो यह है कि धरने पर भी अपनी ही तत्कालीन सरकार और केंद्र सरकार की अकर्मण्यता को आधार बनाकर पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि सरकार भावांतर की राशि किसानों को मुहैया कराये, गेहूं का बोनस मुहैया कराये, रेवेन्यु बुक र्सक्युलर (6-4) के आधार पर मुआवजा वितरित करे।
1. ज्ञातव्य है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने खरीफ 2017 के भावांतर का 576 करोड़ रूपये, खरीफ 2018 के 321 करोड़ तथा अतिरिक्त 6 लाख मेट्रिक टन के 120 करोड़ रू. अर्थात 1017 करोड़ रू. मामा और मोदी सरकार के नकारात्मक रवैये के कांग्रेस सरकार को अब तक प्राप्त नहीं हुये।
2. दुःखद और शर्मनाक तथ्य यह भी है कि भाजपा नेता शिवराजसिंह चौहान के कहने पर केंद्र की वर्तमान भाजपा सरकार ने 8 लाख 70 हजार मेट्रिक टन समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद का लगभग 1500 करोड़ रू. भुगतान नहीं किया। उसका तर्क भाजपा की केंद्र सरकार ने यह दिया कि चूंकि किसानों को कमलनाथ सरकार बोनस दे रही है, इसलिए यह राशि नहीं दी जाये। यह बात शिवराज भली-भांति जानते हैं, क्योंकि उन्होंने ही यह राशि रूकवायी है।
3. मध्यप्रदेश में अतिवर्षा और बाढ़ से प्रदेश के नागरिकों और प्रदेश के संसाधनों का 11 हजार 861 करोड़ रू. से अधिक का नुकसान हुआ है। यशस्वी मंख्यमंत्री कमलनाथ जी ने प्रदेश के किसानों को आश्वस्त किया है कि 15 अक्टूबर तक सभी किसानों को रेवेन्यु बुक र्सक्युलर (6-4) के अनुसार मुआवजा वितरित कर दिया जायेगा।
4. भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराजसिंह चौहान आज किसानों से कह रहे हैं कि बिजली के बिल जला दीजिए, तो उन्हें ज्ञात होना चाहिए कि सत्ता जाने के पूर्व पांच वर्षों तक 2 लाख 25 हजार किसानों के बिजली चोरी के झूठे मुकद्मे दर्ज करके वर्षों तक बिजली के कनेक्शन काट दिये थे और 75 हजार घरेलू उपभोक्ताओं पर भी बिजली चोरी के झूठे मुकद्मे दर्ज किये थे। तब आपके मन में किसानों के प्रति जरा भी करूणा और दया नहीं जागी। आज आपके पास न जनाधार बचा है न ही आपकी पार्टी में स्वीकार्यता, तब आप इसी तरह अपनी निराशा प्रदर्शित कर रहे हैं।