केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ने संविदा एवं आर्बिट्रेशन पर हैदराबाद में 2 दिन की कार्यशाला का उद्घाटन किया

हैदराबाद, 6 फरवरी 2020: संविदा निर्धारण को मजबूत बनाने के लिए संविदा एवं अर्बिट्रशन पर 2 दिन की कार्यशाला का आज श्री शरद कुमार, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, भारत सरकार ने हैदराबाद में उद्घाटन किया जिसमें पीएसयू के 100 से अधिक अधिशासियों ने भाग लिया। उद्घाटन के अवसर पर सीएमडी, एनएमडीसी श्री एन.बैजेंद्र कुमार, स्वतंत्र निदेशक श्री अशोक कुमार अंगुराणा, श्री डी. कुप्पूरामू के साथ निदेशक-उत्पादन श्री पी.के.सतपथी, निदेशक-वित्त श्री अमिताभ मुखर्जी, निदेशक-वाणिज्य श्री आलोक कुमार मेहता, निदेशक-कार्मिक श्री सुमित देब तथा श्री वी.वी.एस.श्रीनिवास, मुख्य सतर्कता अधिकारी भी उपस्थित थे।


कार्यशाला का आयोजन निविदा के विभिन्न चरणों पर कनिष्ठ प्रबंध तंत्र से मध्यम प्रबंध तंत्र तक फ्रंट लाइन स्टाफ को निविदाकरण की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा यह जानकारी देने के लिए किया गया कि बिना किसी समस्या के उसका सफलतापूर्वक निष्पादन करने के लिए पर्याप्त उपाय कैसे किए जाने चाहिए। एनएमडीसी द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में मिश्र धातु निगम (मिधानी), भारत डॉयनॉमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), इलेक्टॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीआईएल) से भी प्रतिभागी शामिल हुए।


इस अवसर पर बोलते हुए श्री शरद कुमार, सी वी सी, भारत सरकार ने कहा कि, “ यह एक महत्वपूर्ण कार्यशाला है क्योंकि पीएसयू को निविदाकरण  तथा संविदा के निष्पादन , दोनो ही समय कोई त्रुटि न हो, यह जांच करने के लिए अतिरिक्त रूप से सावधानी बरती चाहिए।“ उन्होंने यह भी कहा कि लोक प्रापण में गुणवत्ता तथा दरों की उपयुक्त्तता प्राप्त करने के लिए निविदाओं में एल-1 प्रणाली समीक्षाधीन है।  “ निविदा पर निर्णय लेते समय एल-1 सर्वोत्तम उपाय नही भी हो सकता है क्योंकि यदि हम केवल लागत के इसी अधार पर निर्णय लेते हैं तो गुणवत्ता पर असर पड सकता है और उससे संगठन पर विपरीत प्रभाव पड सकता है तथा स्वतंत्र बाह्य मॉनीटर्स (आई ई एम) की भूमिका तब प्रारम्भ होती है जब कोई संविदा संबंधी मामला संदर्भित किया जाता है एवं यह सतर्कता का विकल्प नही है।“


श्री एन.बैजेंद्र कुमार, आईएएस, सीएमडी, एनएमडीसी ने अपने सम्बोधन में कहा कि , “ एनएमडीसी जैसे पीएसयू संगठन के लिए त्रुटि रहित संविदा तैयार करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसे अनेक मामले हैं जनके कारण संगठन को अस्पष्ट संविदाओं के कारण अर्बिट्रेशन में जाना पडा ।“ उन्होंने पीएसयू के अधिकारियों से आग्रह किया कि अर्बिट्रेशन/ विवाद से बचने के लिए एवं सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए वे निविदाकरण का पूर्ण ज्ञान रखें।  उन्होंने यह भी कहा कि संविदा तैयार करने तथा उसके प्रबंधन की समझ से विशेषज्ञता प्राप्त होगी तथा संविदाओं को पारदर्शिता से बनाने में सहायता मिलेगी।


श्री वी.वी.एस.श्रीनिवास, मुख्य सतर्कता अधिकारी, एनएमडीसी ने कहा कि,” संविदा तथा अर्बिट्रेशन पर यह कार्यशाला सीपीएसई के कर्मचारियों को प्रभावशाली रूप से निर्णय लेने तथा अर्बिट्रेशन का आत्मविश्वासपूर्वक सामना करने के योग्य बनाएगी। उन्होंने कहा कि          “ अर्बिट्रेशन अपवाद्स्वरूप होना चाहिए क्योंकि यह संदर्भ -विशिष्ट मानकों , ज्ञान कौशल तथा उन लक्षणों को बताता है जिनकी सीपीएसई को निविदाकरण एवं संविदा प्रक्रिया में आवश्यकता है तथा संगठनात्मक उद्देश्यों के विकास का समर्थन करने वाले विषयों की जानकारी देता है।“


श्री के.रामासुब्रमनिया पिल्लई, एफए एवं सीएओ (से.नि.), दक्षिण रेलवे, श्री ई.श्री कुमार, अधिशासी निदेशक (से.नि.), एनएमडीसी तथा श्री ए. प्रीतम कुमार, महाप्रबंधक (से.नि.). सामग्री प्रबंधन, एनएमडीसी कार्यशाला के फेसिलिटेटर हैं। मॉडलों के विकास विशेषज्ञों एवं प्रयोगकर्ताओं के परामर्श एवं से एवं सीवीसी कार्यालय, भारत सरकार एवं सीवीओ, एनएमडीसी के सहयोग से किए गए। 


एनएमडीसी के बारे में: एनएमडीसी इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र का एक नवरत्न उद्यम है एवं भारत का सबसे बडा एकल लौह अयस्क उत्पादक है। यह अपनी उच्च स्तरीय मशीनीकृत लौह अयस्क खानों का प्रचालन छ्त्तीसगढ एवं कर्नाटक में करता है। एनएमडीसी को विश्व के कम लागत वाले लौह अयस्क उत्पादकों में से एक माना जाता है। यह भारत में एकमात्र यंत्रीकृत हीरा खान का प्रचालन पन्ना, मध्य प्रदेश में करता है। कंपनी इस्पात निर्माण के क्षेत्र में विविधीकरण कर रही है तथा देश में अपने नेतृत्व को बनाए रखने के लिए क्षमता का आधुनिकीकरण करने एवं उसमें वृद्धि करने के लिए इसने अनेक पूंजी सघन परियोजनाओं को प्रारभ किया है। इसने विदेश में भी  सफलतापूर्वक कार्य का विस्तार किया है।


 


 


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