एम्स द्वारा ग्लोबल मेंटल हेल्थ एवं डिजिटल साइकेट्री विषय पर एक संगोष्ठी    


मनोरोग विभाग, एम्स भोपाल द्वारा Sangath, भोपाल हब के सहयोग से 06.02.2020 को ग्लोबल मेंटल हेल्थ एवं डिजिटल साइकेट्री विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी विशेष रूप से क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं एवं तकनीक का उपयोग कर इसे किस प्रकार प्रभावशील बनाया जा सकता है, पर केन्द्रित थी। प्रो. (डॉ) सरमन सिंह, निदेशक एवं सीईओ एम्स, भोपाल ने इस आयोजन की अध्यक्षता की संगोष्ठी में अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं में प्रो. विक्रम पटेल, परशिंग स्कूल ऑफ ग्लोबल हेल्थ, हावॅर्ड मेडिकल स्कूल बोस्टोन, यूएसए, डॉ. जॉन टोरस एवं डॉ. एलेना रोडरिगॅज-विल्ला, बेथ इजराइल डीकोन्स मेडिकल सेन्टर, हावॅर्ड मेडिकल स्कूल, बोस्टोन, यूएसए और डॉ. डेज़ी सिंगला, टोरेन्टो विश्वविद्यालय सम्मिलित थे। भारतीय वक्ताओं में डॉ. उर्वक्ष मेहता, नेशनल इंस्ट्टीयूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस, बेंगलूरू, डॉ. कौशिक सिन्हा देब, एम्स, नई दिल्ली और डॉ. अभिजीत पखारे, एम्स, भोपाल सम्मिलित थे। 
     प्रो. (डॉ.) सरमन सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि मानसिक रोगों के मूल्यांकन एवं प्रबंधन  सहित स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को दूर करने के लिए तकनीकी की अह्म भूमिका हो सकती है। उन्होने कहा कि आज के समय में यह अत्यंत प्रासंगिक हैं जब स्मार्टफोन घर-घर पहुंच चुका हैं। डॉ. अभिजीत पखारे द्वारा जानकारी में लाया गया कि 25-50 आयु वर्ग में आत्महत्या एवं हिंसा सहित मानसिक स्वास्थ्य विकार विकलांगता के मुख्य कारण रहें है। प्रो. विक्रम पटेल ने किशोरों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बताया कि उन्हें कैसे सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा कैसे व्यवहारिक किया जा सकता है। डॉ. डेज़ी सिंगला द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए जानकारी में लाया गया कि मानसिक स्वास्थ्य विकारों के उपचार में समुदाय प्रबंधन बिना औषधि के उपचार में कैसे सहायक सिद्ध हो सकते है। डॉ. कौशिक सिन्हा देब ने अपने शोध विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मानिसक रूप से पीडि़त व्यक्ति की देखभाल करने में स्मार्टफोन का उपयोग कैसे सहायक हो सकता है। डॉ. जॉन टोरस और डॉ. एलेना द्वारा दिखाया गया कि उनके द्वारा विकसित की गई ऐप का उपयोग कर कैसे मरीजों के क्रियाकलापों का आंकलन किया जा सकता है और मरीजों को अपनी जीवन शैली मॉनिटर करने में भी मदद कर सकता हैं। डॉ. उर्वक्ष मेहता ने छात्रों को बताया कि मानसिक मरीजों के लिए कैसे नये डिजिटल उपकरण विकसित और उपयोगी हो सकते है।
     यह सम्मेलन वर्तमान में Sangath भोपाल, एनआईएमएचएएनएस बेंगलुरू, बीआईडीएमसी बोस्टन, यूएसए, और एम्स भोपाल द्वारा शोध अध्ययन के एक भाग के रूप में आयोजित किया गया था। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य मरीजों के बार-बार अस्वस्थ होने की प्रक्रिया में स्मार्ट फोन की मदद आधारित था। सम्मेलन में 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर छात्र, मनोचिकित्सक एवं मनोवैज्ञानिक शामिल हुए।