वादा था नियमितीकरण का पर कर रहे हैं ठेकों का नवीनीकरण

म.प्र. बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रान्तीय संयोजक मनोज भार्गव ने इस बात पर गहन आक्रोश व असंतोष व्यक्त किया है कि म.प्र. की काँग्रेस सत्तारूढ़ दल ने अपने वचन-पत्र के बिन्दु क्रमांक-13.11 में बिजली कम्पनियों के रिक्त पद 60 दिन में भरने एवं वचन-पत्र के बिन्दु क्रमांक-47.16 में ठेकाकर्मियों के नियमितीकरण का वादा किया था, किन्तु 365 दिन बीतने के बाद भी न तो रिक्त पदों की भर्ती की गई और न ही ठेकाकर्मियों का नियमितीकरण किया गया, बल्कि सरकार ठेकों के नवीनीकरण की तरफ बढ़ रही है । नव वर्ष 2020 में म.प्र. की 6 बिजली कम्पनियों ने जबलपुर, इन्दौर, ग्वालियर, गुना, शहडोल आदि क्षेत्रों में नई आउटसोर्स कम्पनियों से मानव बल देने हेतु निविदाऐं आमंत्रित की हैं, जो वचन-पत्र की भावना के प्रतिकूल है । म.प्र. की काँग्रेस सत्तारूढ़ दल ने अपने वचन-पत्र में यदि ठेकाकर्मियों से वायदा नियमितीकरण का किया है, तो फिर ठेका अवधि दो साल के लिए क्यों बढ़ाई जा रही है? राज्य सरकार बिना खर्च वाली माँग माने जाने के तहत् उप पद सृजित कर वर्तमान वेतन पर ही ठेकाकार्मियों को उनकी वरिष्ठता व योग्यता के आधार पर बिजली कम्पनी के रिक्त पड़े पदों पर नियमित करने का प्रयास क्यों नहीं कर रही है? ताकि राज्य सरकार बिना वित्तीय बोझ के ठेकाकर्मियों की माँग पूरी कर सकें ।
इस संबंध में प्रान्तीय संयोजक मनोज भार्गव ने मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री को पत्र प्रेषित कर कहा है कि खेदजनक बात है कि बिजली आउटसोर्स ठेकाकर्मियों की मासिक मजदूरी को केन्द्र सरकार व तेलंगाना राज्य के ठेकाकर्मियों की न्यूनतम मजदूरी के बराबर दिये जाने के बजाए अब नए ठेकों में योग्यता का पैमाना बढ़ाया जा रहा है, इसलिए अब ऐसी परिस्थिति में पुराने ठेकाकर्मियों को हटाया नहीं जाये, बल्कि पूर्व से कार्यरत ठेकाकर्मियों को यथावत् नियुक्ति प्रदान कर उनकी सेवायें निरंतर जारी रखे जाने हेतु उनसे आवश्यक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ।


(मनोज भार्गव)
प्रान्तीय संयोजक