*नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने की बाल कहानी लिखा जाना जरूरी*



*नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने की बाल कहानी लिखा जाना जरूरी* यह विचार डॉक्टर उमाशंकर नगाइच

ने बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र द्वारा श्रीमती रागिनी उपलपवार  के बाल कहानी संग्रह हार से मिला हौसला के अवसर पर व्यक्त किए कार्यक्रम में समीक्षक डॉ कुमकुम गुप्ता ने कहा कि इस संग्रह में किताबों को पढ़ने का महत्व तथा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मदद तथा दादा जी से मिलने गांव जाते रहने की शिक्षाप्रद कहानियां है।दूसरी समीक्षक डॉ विनीता राहुरीकर ने कहा कि हार से मिला हौसला कहानी संग्रह की कहानियां बच्चों में पर्यावरण की रक्षा तथा बच्चों को लाइब्रेरी से पुस्तके लेकर पढ़ने की सीख देती हैं।विशेष अतिथि डॉ मालती बसंत ने कहा कि रागिनी का यह कहानी संग्रह शिक्षाप्रद मनोरंजक तथा सरल भाषा के स्तर पर बाल पाठकों के मन की कृति है।श्रीमती इंदिरा त्रिवेदी (विशेष अतिथि) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल मन को समझ कर कहानियां लिखी जाने पर वे उनके विचारों की कहानियां हो जाती हैं जिन्हें वे रूचिपूर्वक पढ़ते हैं उन्होंने कहानी संग्रह में  चित्रांकन की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे बोलते चित्र संग्रह को आकर्षक बना देते है। अध्यक्ष डॉ प्रेम भारती ने कहा कि बाल साहित्य की हर विधा की रचनाएं बच्चों को संस्कारित करती हैं आज के समसामयिक विषय पर लिखा जाना जरूरी है।कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन निदेशक महेश सक्सेना ने दिया तथा संग्रह की रचनाकार रागिनी उपलपवार ने *हार से मिला हौसला* कहानी का पाठ किया।

कार्यक्रम में अरुण तिवारी,युगेश  शर्मा,जया आर्य,आशा शर्मा,प्रीति प्रवीण खरे डॉ  गौरीश, नीना सिंह सोलंकी,जय जय रामानंद आशा श्रीवास्तव गोकुल सोनी आशा श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे।

संचालन कीर्ति श्रीवास्तव ने किया तथा आभार अनिल कुमार उपलपवार ने माना।

*महेश सक्सेना*


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